प्रिय विद्यार्थी , मैं आपके अपने इस ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनंदन करता हूं। आपको यहां
पर कॉमर्स नॉलेज, स्टडी टिप्स, लेखाशास्त्र, लेखांकन सॉफ्टवेयर व कॉमर्स कोर्स न्यूज से संबंधित जानकारी मिलती
रहेगी। आज के टॉपिक में जानेंगे की - अध्ययन क्यों जरूरी है? अब आपको कोई नहीं रोक सकता अच्छे नंबर लाने से।
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हम सभी अपने अनुभव
के आधार पर अध्ययन का मुख्य उद्देश्य कुछ सीखना को ही समझते हैं। जबकि अध्ययन का उद्देश्य सीमित नहीं है
बल्कि अध्ययन तो असीमित है। अध्ययन वो जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
अध्ययन करने के कई कारण हो सकते हैं। यह
बात आप भी जानते हैं कि एक ही पुस्तक को अलग-अलग व्यक्ति पढ़ते हैं। तब उनके पढ़ने
के उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए आप कॉमर्स के विद्यार्थी हैं और व्यवसाय
अध्ययन पुस्तक में आपने सेल्स से संबंधित उदाहरण पढ़ा।
इस उदाहरण को आपने अपने पड़ोसी
सहपाठी को बताया जिससे वह सहपाठी प्रसन्न होकर व्यवसाय अध्ययन के उदाहरण को पढ़ा। जबकि
वह सहपाठी विज्ञान वर्ग का छात्र है।
जबकि
विज्ञान वर्ग के सहपाठी ने उस उदाहरण को उदाहरण की तरह न पढ़कर प्रेरणा या पसंद के रूप में पढ़ा क्योंकि वो उदाहरण उनको बहुत पसंद आया था। चूँकि वो उदाहरण आपके सिलेबस का पार्ट है तो आप उस अध्याय की समीक्षा करेंगे और महत्वपूर्ण बातों
को समझेंगे और महत्वपूर्ण बातों को याद भी करेंगे जबकि आपके पड़ोसी सहपाठी को इस
तरह से पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं है।
आपके मित्र ने उस उदाहरण को केवल मनोरंजन के
लिए पढ़ा है। अब आप समझ सकते हैं कि आप के सहपाठी मित्र के पढ़ने के तरीका, आपसे बिल्कुल अलग होगा।
जब एक सामान्य दर्शक कोई फिल्म देखता है और जब
उसी फिल्म को एक फ़िल्म समीक्षक देखता है तो दोनों के देखने में जमीन - आसमान का
अंतर होता है।
क्योंकि आम या
सामान्य दर्शक का उद्देश्य मनोरंजन करना
है। इसलिए उस दर्शक का ध्यान केवल फिल्म की कहानी, गीत-संगीत और नृत्य आदि पर होंगे।
जबकि
फिल्म समीक्षक सामान्य दर्शक द्वारा देखे जाने वाली बातों के साथ-साथ फिल्म की
फोटोग्राफी,
संपादन, सीन-कट आदि छोटी-बड़ी बातें ध्यान में
रखता है।
यदि आप और हम
फोटोग्राफर नहीं है तो सूर्यास्त का दृश्य एक मनोहर दृश्य लगेगा। जबकि यही दृश्य
एक फोटोग्राफर के लिए रचनात्मकता का अद्भुत क्षण होगा। उपयुक्त उदाहरणों से यह बात
स्पष्ट हो गई होगी कि एक ही विषय अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अध्ययन के अलग-अलग रूप
प्रस्तुत करता है।
सामान्य तौर पर डॉ.
विजय अग्रवाल जी द्वारा किसी भी अध्ययन के उद्देश्य निम्नलिखित बताए गए हैं- 1. मनोरंजन (टाइम पास करना ) के लिए ,
2.
परीक्षा में
उत्तीर्ण होने के लिए तथा,
3.
अपनी समझ विकसित
करने के लिए ।
समझ विकसित करने के लिए पढ़ने वाले पाठक भी होते
हैं।
जिन्हें किसी भी तरह
की परीक्षा नहीं देनी होती फिर भी वे पढ़ते हैं ताकि अपने समय का समुचित उपयोग कर
सकें,
अपने ज्ञान में
वृद्धि कर सके,
अपने मस्तिष्क को
तरोताजा बनाए रख सके, अपने जीवन के बारे में समझ सके।
आपके मस्तिष्क में
यह बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए कि आप किसी भी पुस्तक को क्यों पढ़ रहे हैं।
ऐसे विचार जो या तो पढ़ाई करने पर मजबूर कर देंगे या फिर आपके दिमाग को हिला
कर रख देंगे।
1. “तेरे हौसले
इतने मजबूत होने चाहिए की तू बांस की झोपड़ी में पढ़कर महलों में पढ़ने वालों को
हरा सके।”
2. “प्यार
शब्द में पहला अक्षर आधा है और पढ़ाई शब्द में पहला अक्षर पूरा। इच्छा आपकी है
आपको आधा चाहिए या फिर पूरा।”
3. “अपने समय को बर्बाद करने वाले लोग
ही सबसे पहले समय की कमी का रोना रोते हैं।”
4. “यदि
हर सुबह नींद खुलते ही किसी लक्ष्य को लेकर तू उत्साहित नहीं है तो तू जिंदगी जी
नहीं रहा बल्कि काट रहा हैं। अब तेरी इच्छा है की तू लक्ष्य बनाएगा या फिर यूँ ही
सारे काम करता चला जाएगा।”
5. “लगातार
पढाई या लगातार मेहनत करने वालों पर कभी न हँसिए.......................
आपकी हंसी का दायरा कम हो जायेगा जब वो बड़ा अधिकारी या
बड़ा व्यापारी बन जायेगा।”
6. “वक्त
कम है जितना दम है लगा दो, कुछ लोगों को मैं जगाता हूं कुछ को तुम
जगा दो।”
यह उन लोगो के लिए जो यह सोचते हैं………………………….
7. “अजगर
करे न चाकरी, पंछी करे न काम।
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।”
अर्थ - काम
करने की जरूरत नहीं है क्योंकि न तो अजगर जैसा बड़ा जानवर काम करता है और न ही
पक्षी जैसा छोटा सा जीव। भगवान की कृपा से
सब का पेट पलता रहता है।
इस सिद्धांत को मानने वालों की कमी नहीं है। लेकिन मुझे
नहीं लगता कि आप किसी भी ऐसे व्यक्ति का नाम बता सकते हो जिसने इस सिद्धांत को
माना और उसने जिंदगी में बड़ी सफलता अर्जित कर ली हो या जिसका पेट बैठे - बैठे ही
भर गया हो। सफलता हाँसिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। मेहनत भी सही दिशा में
करना जरुरी है नहीं तो कल को आप भगवान से शिकायत करोगे की भगवान मैंने कितनी मेहनत
की लेकिन रिजल्ट जीरो ही रहा।
8. “समय
को चुराना सीखिए। आप विश्वास नहीं करोगे आप बहुत
से काम कर लोगे जो आप समय की कमी
के कारण नहीं कर पा रहे थे।”
9. “समय
को चुराने का मूल मंत्र - आपको जब भी, जंहा भी, जितना भी समय मिले आप उसका उपयोग कर लीजिये।”
आने वाली पोस्ट में हम जानेंगे कि अध्ययन का मनोविज्ञान से क्या सम्बन्ध है।
आशा है की आप सभी को यह पोस्ट पसंद
आएगी। आपके कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताये।
पोस्ट पसंद आये तो शेयर जरूर करे।
मैं आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना
करता हूँ। धन्यवाद ।




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