प्रिय विद्यार्थी,
मैं आपके
अपने इस ब्लॉग पर आपका हार्दिक अभिनंदन करता हूं। आपको यहां पर कॉमर्स नॉलेज, स्टडी
टिप्स, लेखाशास्त्र, लेखांकन सॉफ्टवेयर व कॉमर्स कोर्स न्यूज से संबंधित जानकारी मिलती
रहेगी। आज के टॉपिक में जानेंगे की - अध्ययन कला है या विज्ञान या दोनों । अब आपको
कोई नहीं रोक सकता अच्छे नंबर लाने से।
“जितना कठिन संघर्ष होगा,
जीत उतनी ही शानदार होगी।”
अध्ययन कला है या विज्ञान या दोनों आइए
जानते हैं। यदि आप अध्ययन को थोड़ी गहराई से देखते हैं तो एक ही सिक्के के दो पहलू
मालूम पड़ते हैं। एक ही सिक्के का मतलब अध्ययन से है और उसके दो पहलू क्रमशः ज्ञान
और विज्ञान है। अध्ययन कला है या विज्ञान या दोनों इस तथ्य को जानने से पहले कला व
विज्ञान का अर्थ जान लेते हैं। किसी कार्य को सर्वोत्तम तरीके से करना या अच्छे तरीके
से करना, कला कहलाता है।
विज्ञान मतलब ज्ञान के आगे वि
जुड़ना, विज्ञान कहलाता है। यहां वि का अर्थ
सूक्ष्म होता है अथार्त् सूक्ष्म ज्ञान या गहरा ज्ञान।
विज्ञान- ज्ञान का व्यवस्थित रूप या
प्रकृति के अध्ययन से प्राप्त ज्ञान को विज्ञान कहते हैं। आइये कला व विज्ञान को
उदाहरणों की सहायता से समझते हैं। यदि आपको गाना गुनगुनाना आता है और थोड़ा प्रयास
करने पर भी करने के बाद आप उस गाने को गाना सीख लेते हैं तो आप गायक बन जाते हैं
और यह गायक बनना मतलब आपने गायन करने की कला को पा लिया है।
फिर जितनी ज्यादा
बार अभ्यास करेंगे आपके गायन में और निखार आता जाएगा। जब आप गाना गाने लगते हैं
उसमें कुछ नियमों की आवश्यकता होती है जैसे - स्वर,ध्वनि या ध्वनि यन्त्र से निकली ध्वनि के अनुसार अपने गाने की लय। ये
नियम विज्ञान कहलाता हैं क्योंकि ये नियम स्थायी होते है और इनको बार-बार रिसर्च
करके गायन के अनुकूल बनाया जाता है। विज्ञान का अर्थ केवल रसायन शास्त्र, भौतिक शास्त्र या जीव विज्ञान ही नहीं है वरन् विज्ञान शब्द बहुत
व्यापक है। जहां भी एक निश्चित व्यवस्था, नियमों के अनुसार होगी वहां विज्ञान होगा।
हमारे शरीर की ही व्यवस्था को देख
लीजिए - सांस का आना-जाना, भूख लगना, सोना, तथा प्यास लगना
आदि सब कुछ एक व्यवस्थित तरीके से होता जा रहा है। विज्ञान विज्ञान नहीं है। यह तो
अद्भूत विज्ञान है। अद्भुत इस मायने में है कि पहले तो हम इस लेख को पढ़ते हैं।
फिर पढ़े हुए भावों की प्रतिलिपि को अपने मस्तिष्क पर बनाते हैं। हमारा मस्तिष्क
यही नहीं रुकता वो उन भावों को काट- छांट करके उन्हें संजोता है।
यहां तक कि कई बार हमारा मस्तिष्क अपनी
तरफ से नई बातें जोड़कर उनका रुप ही बदल देता है। मतलब आपने किसी वाक्य या उत्तर
को याद कर लिया और आपसे यह कहा जाए कि इस वाक्य या उत्तर को अपने शब्दों में बोलो
या लिखो तो आपका मस्तिष्क उसको काट- छांट कर व नई बातें जोड़कर आपको बोलने के लिए
कहेगा। यहां आप इसकी तुलना कंप्यूटर की प्रक्रिया से करें तो आप जो कुछ भी टाइप
करते हैं तो वह मेमोरी में चला जाता है। उसमें एडिटिंग करते होंगे या फिर सेव कर
लेते हैं।
जब आपको उस टाइप किए हुए मैटर की जरूरत
पड़ती है तब आप उस फ़ाइल को ढूंढकर स्क्रीन पर लाते हैं। मेरा आपसे केवल यह प्रश्न
है कि यदि कंप्यूटर विज्ञान है तो फिर क्या हमारा मस्तिष्क विज्ञान नहीं हो सकता। हमारा
दिमाग एक विलक्षण कंप्यूटर है। दिमाग तो कम्प्यूटरों का कंप्यूटर है।
विशेष बात - जब किसी काम को करने का
नियम तो एक होता है लेकिन उसे करने के ढंग अलग - अलग हो जाते हैं तो वह प्रक्रिया
कला बन जाती है। आइए आपको एक छोटे से उदाहरण से बताते हैं कि मान लीजिए हम क्रिकेट
देखते है। क्रिकेट में दो खिलाड़ी है जो कि बैट्समैन है। आपको पता होगा कि क्रिकेट में बैट्समैन
और गेंदबाज के लिए अलग-अलग नियम होते है लेकिन हम अभी उदाहरण में सिर्फ 2 बैट्समैन की बात करेंगे और
यह जानने की कोशिश करेंगे की वाकय इसमें विज्ञान है या फिर कला या दोनों।
आपको पता है क्रिकेट के सभी
बल्लेबाज ( बैट्समैन) क्रिकेट के भी नियमों का अनुसरण करते हैं तो जो सभी
बल्लेबाजों के लिए जो नियम है वो विज्ञान कहलाता है। उन दोनों बैट्समैन में से एक
बैट्समैन ने 82 रन बनाए दूसरे ने 26 रन बनाए। दोनों बैट्समैन के लिए नियम तो एक ही थे और तो यह नियम ही
विज्ञान है। अब दोनों बल्लेबाजों ने अपनी योग्यता के अनुसार अलग-अलग रन बनाये। रन
बनाने का तरीका कला है।
तो इसका सीधा सा मतलब हुआ कि
यह जानना कि 'कैसे होता है' विज्ञान है ,तथा
यह जानना कि 'कैसे किया जाता है', कला है।
ठीक यही बात अध्ययन के साथ भी लागु
होती है। अध्ययन की अपनी एक निश्चित
वैज्ञानिक पद्धति होती है, लेकिन जब इस
पद्धति का उपयोग किया जाता है तब हर विद्यार्थी के साथ अलग-अलग तरह की घटनाएं घटती
है।
पढ़ने की पद्धति तो एक है लेकिन पढ़ने
वाले तो एक- से नहीं है। प्रकृति ने हर व्यक्ति को हर दृष्टि से अलग अलग बनाया है।
प्रत्येक व्यक्ति की रुचि अलग-अलग है। हर व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्षमता
अलग-अलग है। हर व्यक्ति की परिस्तिथिया और वातावरण अलग-अलग है। इसीलिए यह भी
स्वाभाविक है की अध्ययन का नियम एक होने
के बावजूद उसके परिणाम अलग-अलग प्राप्त होते है। लेकिन इतना जरूर
है कि जो भी इस पढ़ने की कला को समझ लेगा वह निश्चित रूप से अपने परिणाम को बेहतर
बना लेगा।
प्रकृति का एक शाश्वत नियम है कि जब
कोई भी काम व्यवस्थित तरीके से किया जाता है तो उसके परिणाम पहले से बेहतर ही होंगे।जंगल में पेड़ उगते हैं। बिना देखभाल के
वे पेड़ काफी बड़े हो जाते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें देखभाल की
जरुरत ही नहीं होती। यदि उन पेड़ो को व्यवस्थित तरीके से लगाया जाए और उनकी देखभाल
की जाए तो वहीं पेड़ पहले की अपेक्षा तेज गति से बढ़ेंगे और अधिक व्यास वाले तथा अधिक
लंबे भी होंगे और फल भी प्राप्त हो जाये।
आशा है की आप सभी को यह पोस्ट पसंद
आएगी। आपके कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताये। आने वाले पोस्ट में हम जानेंगे की अध्ययन क्यों जरूरी है?
पोस्ट पसंद आये तो शेयर जरूर करे।








टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
यदि आपके कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें। यदि आप लोगों को यह पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करे । यदि आपको पोस्ट पसंद न आये तो कमेंट करके जरुर बताये कि आपको पोस्ट क्यों पसंद नहीं आयी ?